निचली अदालत की सजा को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार
छत्तीसगढ़| हाई कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना और दहेज मृत्यु के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. हालांकि, न्यायालय ने मानवीय आधार पर सजा की अवधि में आंशिक राहत दी है. पति योगेश कोसले की सजा 10 वर्ष से घटाकर न्यूनतम 7 वर्ष कर दी गई है, जबकि 87 वर्षीय ससुर आधार दास कोसले को जेल भेजने से न्यायालय ने इंकार कर दिया.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सिविल लाइन थानाक्षेत्र बिलासपुर का है और घटना वर्ष 2002 की है. अभियोजन के अनुसार, विवाह के 3-4 वर्षों के भीतर महिला और उसकी एक वर्षीय बच्ची की रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी. जांच में सामने आया कि महिला को उसके पति योगेश कोसले और ससुराल पक्ष द्वारा लगातार दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था. मृतका के पिता, भाई और पड़ोसियों के बयानों में यह सामने आया कि, विवाह के बाद से ही दहेज को लेकर ताने और मारपीट होती थी. बेटी के जन्म के बाद प्रताड़ना और बढ़ गई. एक लाख की मांग व्यापार शुरू करने के नाम पर की गई और पति शराब के नशे में मारपीट करता था.
ट्रायल कोर्ट का निर्णय
आठवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी), बिलासपुर ने 28 फरवरी 2005 को धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत 10 वर्ष सश्रम कारावास, धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) में दोष सिद्ध का आदेश दिया था.

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