गदा नहीं, धनुष-बाण वाले ‘हनुमान’! इस मंदिर में छिपा है शत्रुघ्न और लवणासुर युद्ध का त्रेतायुगीन रहस्य
आज हम आपको एक ऐसे हनुमान मंदिर की कहानी बताने जा रहे हैं जिनका इतिहास त्रेतायुग से बताया गया है. किंवदंती है कि इस मंदिर में श्री राम के अनुज शत्रुघ्न ही महावीर के रुप में विराजमान हैं. इसलिए यहां हनुमान जी की मूर्ति गदा नहीं धनुष-बाण लिए है. यह मूर्ति भी एक चट्टान से प्रकट बताई जाती है.
मां लवकुश नगर शहर का इतिहास माता बंबरबेनी से जुड़ा है. दरअसल, माता बंबरबेनी मां सीता ही थीं. रामायण में वाल्मीकि आश्रम चित्रकूट बताया जाता है. और यह जगह चित्रकूट से 150 किमी दूर है. यहां भी वाल्मीकि आश्रम का परिसर आता था. यहां मां बंबरबेनी पहाड़ी है. जहां साधु-संत, ऋषि मुनि तपस्या करते रहते थे लेकिन इसी पहाड़ी के सामने एक और पहाड़ी है जहां पर लवणासुर नाम का राक्षस रहता था. यह राक्षस आए दिन साधु-संत की तपस्या और यज्ञ हवन-पूजन में बाधा डालता रहता था.
साधु-संत ने ली रामजी की शरण
फिर एक दिन सभी ऋषि मुनि और साधु-संत प्रभु श्री राम की शरण में गए. प्रभु श्री राम जी उन्हें आश्वासन दिया कि निश्चिंत होकर अपनी तपस्या कीजिए. लवणासुर के वध के लिए मैं अपने छोटे भाई शत्रुघ्न को भेजता हूं. जैसे ही शत्रुघ्न को जानकारी दी जाती है वह लवणासुर का वध करने के लिए निकल पड़ते हैं.
लवणासुर का किया वध
सभी ऋषि मुनि शत्रुघ्न का स्वागत करते हैं और लवणासुर की उस पहाड़ी की भी जानकारी देते हैं जहां लवणासुर रहता था. इसके बाद शत्रुघ्न और लवणासुर के बीच भीषण युद्ध होता है. जिसमें लवणासुर मारा जाता है और शत्रुघ्न की जीत होती है. सभी ऋषि मुनि और भक्त शत्रुघ्न महाराज से विनती करते हैं कि आपका इसी पहाड़ी के सामने आपको स्थापित करना चाहते हैं. इसके बाद एक बड़ी सी शिला से शत्रुघ्न महाराज की मूर्ति प्रकट होती है. जिसके बाद यहां शत्रुघ्न भगवान स्थापित कर दिए जाते हैं और कालांतर में यहां मंदिर भी बना दिया जाता है.
महावीर मंदिर के नाम से प्रसिद्ध
वहीं मंदिर के पुजारी बताते हैं कि ये मंदिर तो शत्रुघ्न भगवान का है लेकिन अब इस मंदिर को महावीर मंदिर के नाम से जाना जाने लगा है. ज्यादातर लोग इस मूर्ति को ध्यान से नहीं देखते हैं और वह हनुमान जी की मूर्ति समझ लेते हैं. जबकि इस मूर्ति में शत्रुघ्न भगवान ने गदा नहीं धनुष-बाण ले रखा है. फिर भी जो इस मूर्ति के बारे में जानते नहीं हैं तो वह इसे हनुमान मंदिर ही समझ लेते हैं.

संसद में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी टकराव, राहुल गांधी की बैठक से क्या निकलेगा हल?
CJP प्रोटेस्ट विवाद: सरकार ने कहा- संवाद के रास्ते खुले, 4 बार भेजा बातचीत का न्योता
शिक्षा पर कितना निवेश, कितना बदलाव? मोदी सरकार के 12 साल का डेटा आया सामने
झाबुआ रेल विवाद: 6 घंटे इंतजार के बाद यात्रियों ने रोका ट्रैक, बोले- लोकल को दी जा रही प्राथमिकता
'युवा सीधे संवाद चाहते हैं', विक्रमादित्य सिंह ने PM मोदी को दिया सुझाव
₹35 हजार का जुर्माना और 1000 लोगों को भोज, छत्तीसगढ़ से सामने आया चौंकाने वाला मामला
आलिया भट्ट, माधवन समेत कई सेलेब्स आए छात्रों के समर्थन में, सोशल मीडिया पर रखी राय