बिहार की राजनीति में नया सवाल, क्या निशांत उठा पाएंगे नीतीश की विरासत
नई दिल्ली|मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हो गए हैं. पार्टी में बड़े नेता जरूर हैं लेकिन अपने पिता की सियासी विरासत को निशांत कितना संभाल पाएंगे ये सबसे बड़ा सवाल है. पार्टी के युवा विधायक हों या फिर कार्यकर्ता, उन्हें निशांत पर भरोसा है. वे काफी दिनों से मांग कर रहे थे कि निशांत आएं. उनके आने से पार्टी बचेगी. अब जब वे जेडीयू में शामिल हो ही गए हैं तो उनके सामने एक दो नहीं बल्कि पांच ऐसी चुनौतियां हैं जिससे उनका सामना होगा. इसे समझिए|
1) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुरू से अति पिछड़ा वोट बैंक को गोल बंद करने की राजनीति की. यही वजह रही कि 1994 में जैसे ही वह लालू यादव से अलग हुए तो 1995 में उन्होंने अकेले दम पर समता पार्टी से चुनाव लड़ा. एक साल में ही सात सीटों पर कब्जा जमाया था और 2000 में वह संख्या बढ़कर 37 हो गई थी. इसकी बड़ी वजह रही थी कि गैर यादव पिछड़ा और अति पिछड़ा का वोट नीतीश के पाले में जाता रहा. ऐसे में निशांत कुमार के लिए बड़ी चुनौती होगी कि जेडीयू का जो कोर वोटर है उसमें कोई बिखराव नहीं हो|
2) 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया. यही वजह रही कि हर चुनाव में महिला वोट नीतीश के पाले में जाते रहा. महिला वोटर्स के लिए उन्होंने कई तरह की योजनाओं को लागू किया. शराबबंदी जैसे बड़े फैसले लिए. ऐसे में निशांत को भी सरकार में रहकर महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर ज्यादा से ज्यादा फोकस करना होगा|
3) दूसरी ओर निशांत को जेडीयू के सभी बड़े नेताओं, छोटे नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा ताकि आने वाले 2030 के बिहार विधानसभा चुनाव में निशांत की अलग पहचान बन सके. इस पर उन्हें विशेष काम करना होगा. जनता के बीच जाना होगा. उनका भरोसा जीतना होगा|
4) नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद चर्चा है कि बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. खैर नई सरकार में जो भी हो और निशांत को जो भी जिम्मेदारी मिले लेकिन उन्हें सियासत में पूर्ण रूप से एक्टिव रहने की जरूरत होगी. खुद के लिए एक तरफ जहां मेहनत की जरूरत होगी तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के लिए अपनी ओर से क्या करते हैं यह भी देखने वाली बात होगी|
5) वहीं सबसे बड़ी बात है कि जिस तरह से वोटर्स ने नीतीश कुमार पर भरोसा किया उसी तरह निशांत पर भी करें. क्योंकि नीतीश कुमार की साफ छवि रही है. बेटे निशांत के लिए एक तरफ जहां पार्टी है तो दूसरी ओर पिता की ओर से किए गए काम को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है. इसके लिए वे प्रचार-प्रसार करें, सभा करें, यानी जनता के सामने यह बात लानी होगी कि निशांत जो हैं वो अपने पिता की तरह ही हैं|

मोनालिसा भाग गई है…’—पति का दावा, लोगों से खोजने की अपील
होर्मुज तनाव का असर भारत पर—ट्रंप के ऐलान के बाद सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी 23,600 के नीचे
मिशन गिद्ध: भोपाल से उड़कर पाकिस्तान पहुंचा, 7 दिन में तय की 1274 KM दूरी—क्या है वजह?
अमेरिका की कार्रवाई से होर्मुज बंद, वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा—ऊर्जा संकट बढ़ सकता है
खौफनाक मर्डर मिस्ट्री: बिस्तर के अंदर छिपाई गई डांसर की लाश, बदबू से खुला राज
कैलाश विजयवर्गीय का आरोप: ‘पश्चिम बंगाल में कदम रखते ही गिरफ्तारी’, 38 मामलों को बताया फर्जी
भीषण गर्मी की दस्तक: मध्य प्रदेश में तापमान में तेज उछाल, कई शहर 40°C पार—जानें IMD अपडेट