देश में 60 दिन का तेल भंडार, सरकार ने कहा—ईंधन की कोई परेशानी नहीं
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि देश में पेट्रोलियम और एलपीजी (एलपीजी) की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे 'भ्रामक और दुष्प्रचार' पर ध्यान न दें, जिसका उद्देश्य बेवजह घबराहट पैदा करना है।
60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल मिलाकर 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडारण (कवर्न) शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि मध्य पूर्व संकट के 27वें दिन भी देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
सरकार ने कहा, हर भारतीय के लिए लगभग दो महीने की निरंतर आपूर्ति उपलब्ध है, चाहे वैश्विक परिस्थितियां कैसी भी हों। साथ ही अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ देशों में जहां ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, राशनिंग, ऑड-ईवन नियम और पेट्रोल पंप बंद होने जैसी स्थिति है, वहीं भारत में ऐसी किसी भी आपातकालीन उपाय की जरूरत नहीं है।
पेट्रोल पंप मालिकों को राहत
सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ जगहों पर घबराहट में ईंधन खरीदने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन सरकार ने इसे सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक वीडियो का परिणाम बताया। इसके बावजूद सभी उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया गया और तेल कंपनियों ने रातभर डिपो चलाकर सप्लाई बढ़ाई। सरकार ने पेट्रोल पंप मालिकों को राहत देते हुए क्रेडिट सीमा 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन कर दी है, ताकि कार्यशील पूंजी की कमी के कारण किसी भी पंप पर ईंधन की कमी न हो।मंत्रालय ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति के बावजूद भारत को अपने 41 से अधिक वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। देश की सभी रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं और अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले से तय है।
एलपीजी आपूर्ति भी पूरी तरह सुरक्षित
एलपीजी को लेकर भी सरकार ने किसी तरह की कमी से इनकार किया है। मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उत्पादन में 40% की वृद्धि की गई है, जिससे रोजाना उत्पादन 50 हजार मीट्रिक टन(टीएमटी) तक पहुंच गया है, जो कुल आवश्यकता का 60% से अधिक है। अब आयात की दैनिक जरूरत घटकर 30 टीएमटी रह गई है। इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से 800 टीएमटी एलपीजी की खेप पहले से रास्ते में है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगी।
सरकार ने कहा, लगभग एक महीने की एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है और अतिरिक्त खरीद लगातार जारी है। तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से अधिक सिलिंडर की आपूर्ति कर रही हैं। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए व्यावसायिक सिलिंडरों का आवंटन 50% तक बढ़ाया गया है।
पीएनजी को बढ़ावा, लेकिन एलपीजी पर कोई असर नहीं
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है। सिटी गैस नेटवर्क 2014 के 57 क्षेत्रों से बढ़कर 300 से अधिक क्षेत्रों तक पहुंच चुका है और घरेलू PNG कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि पीएनजी को बढ़ावा देने का मतलब यह नहीं है कि एलपीजी खत्म हो रही है। एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।

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