उम्मीदवार चयन पर संगठन का जोर, सोशल मीडिया को नहीं मिलेगी प्राथमिकता
बिलासपुर। जिले में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जिला परिषद सदस्य बनने का सपना देख रहे दावेदारों के लिए अब राह इतनी आसान नहीं होगी, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने टिकट वितरण के लिए सख्त नियम तय किए हैं। अब किसी भी संभावित प्रत्याशी को अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए सबसे पहले संगठन के पास आवेदन करना होगा।
भाजपा की चयन प्रक्रिया
भारतीय जनता पार्टी ने टिकटों की घोषणा के लिए एक त्रिस्तरीय ढांचा तैयार किया है। चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ता को पहले संबंधित मंडल के पास अपना आवेदन देना होगा। मंडल स्तर पर विस्तृत चर्चा और छंटनी के बाद योग्य नामों को जिला इकाई को भेजा जाएगा। अंततः जिला संगठन ही उन नामों पर अंतिम मुहर लगाएगा जो चुनावी मैदान में पार्टी का चेहरा होंगे।
कांग्रेस की रणनीति
दूसरी ओर, कांग्रेस भी अपने हाईकमान के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रत्याशियों का चयन करेगी। हालांकि, वर्तमान में जिला कांग्रेस के भीतर मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियां लंबित होने के कारण पूरी जिम्मेदारी जिला अध्यक्ष के कंधों पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि चुनाव से पहले जल्द ही संगठनात्मक नियुक्तियां कर दी जाएंगी ताकि टिकट आवंटन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।
सोशल मीडिया और जनसंपर्क तेज
आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद से ही संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ गई है। भले ही पार्टियों ने अभी आधिकारिक नाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन कई दावेदारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी उम्मीदवारी का प्रचार शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक बैठकों का दौर चल रहा है और प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए घर-घर दस्तक दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर सक्रिय इन चेहरों में से संगठन किसे अपना आधिकारिक प्रत्याशी चुनता है।

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