शांति प्रस्ताव पर अटका मामला, ईरान बोला—अभी और समय चाहिए
तेहरान। वेस्ट एशिया में युद्ध की आहट भले ही कुछ धीमी पड़ती नजर आ रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अब भी चरम पर है। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। तेहरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संशोधित शांति प्रस्ताव पेश करने से पहले उसे और अधिक समय की आवश्यकता है, क्योंकि इस पर अंतिम मुहर ईरान के सुप्रीम लीडर द्वारा लगाई जानी है। इस देरी ने कूटनीतिक समाधान की प्रक्रिया को फिलहाल सुस्त कर दिया है, हालांकि पर्दे के पीछे बातचीत का सिलसिला अब भी जारी है।
पाकिस्तान समेत अन्य मध्यस्थ देशों को उम्मीद थी कि ईरान जल्द ही नया प्रस्ताव साझा करेगा, लेकिन तेहरान ने आंतरिक विचार-विमर्श और रणनीतिक सुझावों का हवाला देते हुए मोहलत मांगी है। सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस दौरे से लौटने के बाद वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रस्ताव को स्वीकार्य बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा और उनके साथ संपर्क की जटिलताओं के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है। इससे पहले ईरान के उस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खारिज कर दिया था, जिसमें युद्ध समाप्ति के बाद परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की शर्त रखी गई थी। अब तेहरान एक अधिक संतुलित और लचीला रुख अपनाने की कोशिश में जुटा है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया है कि ईरान वर्तमान में गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य ईरान को परमाणु मुद्दे पर झुकने के लिए मजबूर करना है। हालांकि, ईरानी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे मौजूदा हालात को शांतिपूर्ण नहीं मानते और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपने संसाधनों को फिर से मजबूत कर रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने करीब 60 साल बाद तेल उत्पादक संगठन ओपेक से अलग होने का ऐलान कर वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। वहीं, समुद्र में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स द्वारा संदिग्ध जहाजों की तलाशी और इजरायल द्वारा लेबनान में हिज़्बुल्लाह की सुरंगों को नष्ट करने के दावों ने माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ शांति की कूटनीति चल रही है, तो दूसरी तरफ सैन्य और आर्थिक दबाव का खेल भी पूरी तीव्रता से जारी है।

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