प्यार ने तोड़ी धर्म और जेल की दीवारें, अनोखी शादी ने खींचा ध्यान
छतरपुर: मध्यप्रदेश के लवकुशनगर क्षेत्र में इन दिनों एक बेहद अनोखी और फिल्मी लगने वाली प्रेम कहानी सुर्खियां बटोर रही है। सतना केंद्रीय जेल में सहायक जेल अधीक्षिका के पद पर तैनात फिरोजा खातून ने हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हत्या के मामले में सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह चंदला को अपना जीवनसाथी चुना है। 5 मई को संपन्न हुए इस विवाह में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रस्मों के बीच दोनों ने सात फेरे लिए। इस शादी की सबसे भावुक बात यह रही कि वधू पक्ष के परिजनों की अनुपस्थिति में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर कन्यादान की रस्म अदा की और विवाह को संपन्न कराया।
जेल की दीवारों के बीच पनपा प्रेम और विश्वास
रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून सतना जेल में वारंट इंचार्ज के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं, वहीं धर्मेंद्र सिंह चंदला एक चर्चित हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। जेल परिसर में प्रशासनिक कार्यों के दौरान धर्मेंद्र के अच्छे आचरण के कारण वह जेल प्रबंधन के कार्यों में सहयोग करता था, जिसके चलते फिरोजा और उनके बीच संवाद का सिलसिला शुरू हुआ। समय के साथ यह परिचय गहरी दोस्ती में बदला और फिर दोनों ने सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर विवाह करने का साहसिक फैसला लिया। धर्मेंद्र अपनी सजा पूरी करने के बाद पिछले चार वर्षों से बाहर हैं और इस अवधि में भी दोनों का रिश्ता अडिग रहा।
सामाजिक चुनौतियां और कन्यादान की मिसाल
सूत्रों के अनुसार फिरोजा के परिवार वाले इस अंतर्जातीय और अंतर्धार्मिक विवाह के पक्ष में नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने समारोह से दूरी बनाए रखी। ऐसी स्थिति में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बजरंग दल के सदस्यों ने न केवल विवाह की व्यवस्थाओं को संभाला, बल्कि पिता का फर्ज निभाते हुए फिरोजा का कन्यादान भी किया। यह विवाह पूरी तरह हिंदू परंपराओं के अनुसार आयोजित किया गया, जहां दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के धर्म और विश्वास का सम्मान करते हुए साथ रहने की शपथ ली।
राजनैतिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र सिंह चंदला का अतीत एक चर्चित राजनैतिक मामले से जुड़ा रहा है, जहाँ वर्ष 2007 में उन पर चंदला के तत्कालीन उपाध्यक्ष की हत्या के आरोप सिद्ध हुए थे। लगभग चौदह साल के कारावास के बाद अच्छे व्यवहार के आधार पर उनकी रिहाई हुई थी। अब जब उनके विवाह के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गई हैं, तो इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। जहाँ एक बड़ा वर्ग इसे प्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बता रहा है, वहीं कुछ लोग सरकारी सेवा के दौरान एक बंदी के साथ विकसित हुए संबंधों की नैतिकता पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन गया है।

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