राज्यसभा में बढ़ा राघव चड्ढा का कद, याचिका समिति की जिम्मेदारी मिली
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को संसद में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा गया है। उन्हें राज्यसभा की प्रतिष्ठित “याचिका समिति” (कमिटी ऑन पेटिशन्स) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राघव चड्ढा को यह बड़ा पद ऐसे समय पर मिला है, जब कुछ ही सप्ताह पहले उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी से बगावत करते हुए कई अन्य सांसदों के साथ मिलकर बीजेपी की सदस्यता ली थी। इस नियुक्ति को राजनीतिक गलियारों में राघव चड्ढा के बढ़ते कद और बीजेपी में उनकी नई व मजबूत भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या काम करती है यह समिति
राज्यसभा के सभापति द्वारा संसद की इस विशेष समिति का पुनर्गठन किए जाने के बाद राघव चड्ढा को इसकी कमान सौंपी गई है। संसदीय व्यवस्था में यह समिति बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि इसका मुख्य काम देश की आम जनता की ओर से सीधे संसद में आने वाली विभिन्न याचिकाओं, समस्याओं और गंभीर शिकायतों की बारीकी से समीक्षा करना होता है। इसके बाद यह समिति उन मामलों पर गहन विचार-विमर्श करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती है और सदन के पटल पर रखती है।
आम आदमी पार्टी को लगा था बड़ा झटका
गौरतलब है कि कुछ समय पहले राघव चड्ढा के नेतृत्व में ही आम आदमी पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने एक साथ मिलकर पार्टी से नाता तोड़ा था और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। सांसदों के इस बड़े दलबदल के कारण संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में आम आदमी पार्टी की ताकत और संख्या बल को बहुत बड़ा झटका लगा था। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी को इस सियासी उलटफेर से सदन के भीतर अपनी स्थिति और मजबूत करने में बड़ी कामयाबी मिली थी।
नियुक्ति पर छिड़ा सियासी घमासान
राघव चड्ढा को इतनी जल्दी यह अहम पद मिलने के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पूरा विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार और बीजेपी पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि पार्टी बदलने के फौरन बाद राघव चड्ढा को इनाम के तौर पर यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, जो साफ तौर पर एक खास राजनीतिक संदेश देती है। दूसरी तरफ, पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि राघव चड्ढा के लंबे संसदीय अनुभव, उनकी योग्यता और सदन में उनकी लगातार सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें पूरी निष्पक्षता के साथ यह नया दायित्व सौंपा गया है।

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