प्रॉपर्टी विवाद ने पकड़ा तूल, प्लॉट नंबर 68 मामले में जांच की मांग
जबलपुर। जिले के पाटन अंतर्गत बिनैकी क्षेत्र में पीकॉक सिटी ले-आउट के एक भूखंड को बेचने के नाम पर ₹9,60,000 की धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में पीड़िता श्रीमती किरण केशरवानी और रूपाली अग्रवाल ने जबलपुर कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बिल्डर शरद मोर और उसके परिवार के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों का आरोप है कि अनुबंध के तहत पूरी रकम चुकाने के बावजूद न तो उन्हें प्लॉट की रजिस्ट्री दी जा रही है और न ही उनके पैसे वापस किए जा रहे हैं।
कैश, ऑनलाइन और चेक के जरिए किया गया पूरा भुगतान
शिकायत के अनुसार, गवाह आशीष कुमार तिवारी और सर्वेश दुबे की मौजूदगी में 17 मार्च 2025 को प्लॉट नंबर 68 (खसरा नंबर 180/1, रकबा 1.380 हेक्टेयर, साइज 800 वर्गफुट) को खरीदने का अनुबंध हुआ था। पीड़ितों ने तय राशि का भुगतान किस्तों में किया, जिसमें ₹3,25,000 नकद दिए गए। इसके अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक से ₹70,000 आरटीजीएस और ₹65,000 ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। साथ ही भारतीय स्टेट बैंक के चार चेक के माध्यम से ₹2,40,000 और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के चेक से ₹1,00,000 सहित अन्य किस्तों के रूप में पूरी रकम बिल्डर को अदा कर दी गई थी।
एक ही प्लॉट को कई लोगों को बेचा, करोड़ों की हेराफेरी का शक
मामले की जांच और दस्तावेजों से एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि आरोपी बिल्डर ने इसी एक प्लॉट का सौदा कई अन्य लोगों के साथ भी कर रखा है। शरद मोर पर आरोप है कि उसने इसी तरह की धोखाधड़ी करते हुए शारदा प्रसाद तिवारी से ₹15,00000, मनोज तिवारी से ₹6,00,000 और मनीष परसाई से ₹10,00,000 ऐंठ लिए हैं, जिन्हें मिलाकर यह पूरा विवाद करोड़ों रुपये की जालसाजी का रूप ले चुका है।
रजिस्ट्री मांगने पर धमकी और खुदकुशी के ड्रामे का आरोप
आवेदिकाओं ने अपनी शिकायत में बताया कि जब भी वे बिल्डर से अपने भूखंड की रजिस्ट्री की मांग करती हैं, तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है। उल्टा दबाव बनाने के लिए आरोपी शरद मोर ने पूर्व में वर्ष 2021, 2022 और हाल ही में 9 मई 2026 को खुद को नुकसान पहुंचाने (आत्मघाती कदम उठाने) का नाटक भी किया ताकि पीड़ित पक्ष डर जाए। इस संबंध में पीड़ितों द्वारा 9 मई 2026 को विजय नगर थाने में भी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, जिसके बाद अब न्याय के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया गया है।

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