दिव्य और भव्य आयोजन की तैयारी, कैंची धाम में गूंजेगा ‘जय बाबा की’
नैनीताल / कैंची धाम: देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित बाबा नीम करोली महाराज का 'कैंची धाम' आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. हर साल 15 जून को इस पवित्र स्थान पर बाबा के भक्तों का ऐसा अनूठा रेला उमड़ता है कि पूरी घाटी 'जय बाबा की' के उद्घोष से गूंज उठती है. साल 2026 में होने वाला स्थापना दिवस समारोह श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन बाबा ने उस अलौकिक शक्ति केंद्र की नींव रखी थी, जहाँ आज दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज सिर झुकाते हैं. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा उत्तर प्रदेश के ही एक अन्य गांव 'नीम करौली' में कठिन तपस्या करके स्वयं 'नीम करोली बाबा' बन गए और उनकी अलौकिक शक्तियां पूरे विश्व में श्रद्धा का विषय बन गईं.
कैंची के आकार की पहाड़ियों के बीच स्थापना
बाबा नीम करोली महाराज पहली बार साल 1962 में इस पहाड़ी इलाके में आए थे. समुद्र तल से लगभग 1400 मीटर की ऊंचाई पर क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित इस जगह की पहाड़ियों की बनावट हूबहू कैंची के आकार की है, इसीलिए इस पावन स्थल का नाम 'कैंची धाम' पड़ा. बाबा के आगमन के ठीक दो साल बाद, 15 जून 1964 को आश्रम में बजरंगबली (हनुमान जी) की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी, जिसे तब से आधिकारिक तौर पर आश्रम के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस विशेष अवसर पर यहाँ हर साल भव्य मेले और एक विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेने और प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं.
नदी का पानी बन गया घी और हर कंबल में छुपा चमत्कार
बाबा नीम करोली के चमत्कारों की अनगिनत लोककथाएं आज भी भक्तों के बीच बेहद प्रचलित हैं. ऐसी ही एक मान्यता के अनुसार, एक बार स्थापना दिवस के भंडारे के दौरान अचानक देसी घी की कमी पड़ गई थी. तब बाबा के आदेश पर जब पास बहने वाली नदी से कनस्तरों में पानी भरकर लाया गया, तो वह पानी छूते ही शुद्ध देसी घी में बदल गया. हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा की नजर में राजा-रंक, अमीर-गरीब सब एक समान थे और वे सबका कल्याण करते थे. उनके अनन्य भक्तों में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि और महाकवि सुमित्रानंदन पंत जैसी देश की महान विभूतियां शामिल रही हैं.
स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग के लिए प्रेरणा का केंद्र
कैंची धाम का प्रभाव सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एप्पल (Apple) के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक (Meta) के निर्माता मार्क जुकरबर्ग जैसी वैश्विक हस्तियों के लिए भी जीवन की प्रेरणा का सबसे बड़ा केंद्र साबित हुआ. जब ये दोनों दिग्गज अपने शुरुआती जीवन और करियर में कड़ा संघर्ष कर रहे थे, तब कैंची धाम की यात्रा ने उन्हें जीवन में एक नई राह और स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान किया. सितंबर 1973 में वृंदावन में बाबा के ब्रह्मलीन (महाप्रयाण) होने के दशकों बाद भी इस दिव्य स्थल की ऊर्जा वैसी ही बनी हुई है और आज भी यहाँ विदेशी साधकों और आम भक्तों के आने का सिलसिला निरंतर जारी है.

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