शोहरत की बुलंदियों से दर्दनाक दौर तक, याददाश्त खोने के बाद अब वापसी की चाह
यह कहानी बॉलीवुड की उस मशहूर अभिनेत्री अनु अग्रवाल की है, जिन्होंने अपनी सस्पेंस और रोमांस से भरपूर पहली ही फिल्म से रातों-रात शोहरत की बुलंदियों को छू लिया था। साल 1990 में जब निर्देशक महेश भट्ट की फिल्म 'आशिकी' सिनेमाघरों में आई, तो इसने इतिहास रच दिया। इस फिल्म से राहुल रॉय और अनु अग्रवाल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी और दोनों ही रातों-रात स्टार बन गए। दर्शकों को न सिर्फ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी पसंद आई, बल्कि फिल्म के गानों ने भी धूम मचा दी।
म्यूजिक डायरेक्टर नदीम-श्रवण के कंपोजिशन और कुमार सानू की आवाज में सजे 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'नजर के सामने जिगर के पास' जैसे सदाबहार नगमे आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं।
पहली ब्लॉकबस्टर के बाद नहीं चला जादू
'आशिकी' जैसी महासफलता के बाद अनु अग्रवाल को 'किंग अंकल', 'खल-नाइका' और 'रिटर्न ऑफ ज्वेल थीफ' जैसी कई बड़ी फिल्मों में देखा गया। हालांकि, इनमें से कोई भी फिल्म उनकी पहली फिल्म जैसा करिश्मा नहीं दोहरा सकी। फिल्मों में मनमुताबिक कामयाबी न मिलने के कारण उन्होंने धीरे-धीरे अभिनय से दूरी बना ली और साल 1996 के बाद पूरी तरह से एक्टिंग को अलविदा कह दिया।
सांवले रंग के कारण झेलना पड़ा था भेदभाव
अनु अग्रवाल ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में उनके सांवले रंग (डस्की लुक) को लेकर काफी तंज कसे जाते थे। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने एक बड़ा मॉडलिंग प्रोजेक्ट सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि मेकर्स उन पर जबरन गोरा दिखने वाला मेकअप थोप रहे थे। अनु का मानना था कि वे जैसी हैं, उन्हें उसी रूप में स्वीकार किया जाए।
खतरनाक सड़क हादसे ने दी 29 दिनों की 'मौत'
साल 1999 में अनु अग्रवाल के साथ एक ऐसा दर्दनाक कार हादसा हुआ, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। इस भीषण दुर्घटना के बाद वह करीब 29 दिनों तक कोमा में रहीं। मौत के मुंह से बाहर आने के बाद उनकी याददाश्त पूरी तरह जा चुकी थी और उन्हें छोटे बच्चों की तरह जिंदगी की बुनियादी चीजें नए सिरे से सीखनी पड़ीं।
उन्होंने बताया कि जब उनकी मां ने अस्पताल में उन्हें उनकी ही फिल्म 'आशिकी' दिखाई, तो वह अपनी ही तस्वीर को नहीं पहचान पाई थीं। यहाँ तक कि वह अंकों की गिनती भी भूल चुकी थीं। इस झटके के बाद साल 2001 में उन्होंने चकाचौंध भरी दुनिया को पूरी तरह त्याग दिया और पहाड़ों की ओर रुख कर योग और आध्यात्मिकता का रास्ता चुन लिया।
फिल्मी सफर को बताया जिंदगी का सबसे उदास दौर
साल 2015 में अनु अग्रवाल ने अपनी आत्मकथा (बायोग्राफी) ‘अन्यूजुअल: मेमोइर ऑफ द गर्ल हू कम बैक फ्रॉम द डेड’ रिलीज की। इस किताब में उन्होंने अपने फिल्मी सफर को अपनी लाइफ का सबसे निराशाजनक और दुखी करने वाला समय बताया था।
एक बार फिर कैमरे के सामने आने की चाहत
लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहने के बाद, अब अनु अग्रवाल एक बार फिर से बॉलीवुड में कमबैक करने का मन बना रही हैं। वह इन दिनों मुंबई में अच्छे फिल्ममेकर्स और दमदार स्क्रिप्ट की तलाश में मुलाकातें कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर वह दोबारा स्क्रीन पर लौटेंगी, तो कोई बेहद चुनौतीपूर्ण और खास किरदार ही निभाएंगी।

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