नौतपा में ठाकुर जी का इस विधि-विधान से करें पूजा, परिवार में आएंगी सुख-समृद्धि, मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा
ज्येष्ठ माह और नौतपा की भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन प्रभावित कर रखा है. इस बार नौतपा की शुरुआत 25 मई से हुई है, जो 2 जून तक चलेगा. वहीं, इस वर्ष ज्येष्ठ माह में पुरुषोत्तम मास का विशेष संयोग भी बना हुआ है. ऐसे में जहां लोग खुद को गर्मी से बचाने के लिए विभिन्न उपाय कर रहे हैं, वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को भी इस मौसम में शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष सेवा की जाती है.
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इन उपायों को श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है. हिंडौन के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित धीरज शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ माह और नौतपा के दौरान ठाकुर जी की विशेष सेवा करनी चाहिए. सबसे पहले प्रतिदिन उन्हें शीतल जल से स्नान कराना शुभ माना जाता है. स्नान के जल में गुलाब या मोगरे का इत्र मिलाया जाए तो उसका विशेष महत्व बताया गया है.
ठाकुर जी की सेवा का विशेष महत्व
गुलाब और मोगरा दोनों ही शीतल प्रकृति के होते हैं, जिससे ठाकुर जी को गर्मी से राहत मिलती है और पूजा स्थल का वातावरण भी सुगंधित बना रहता है. उन्होंने बताया कि परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की कामना रखने वाले लोगों को प्रतिदिन पंचामृत से भगवान का अभिषेक करना चाहिए. पंचामृत स्नान के बाद भगवान को हल्के, मुलायम और सूती वस्त्र पहनाने चाहिए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो. गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र भगवान को शीतलता प्रदान करने वाले माने जाते हैं.
मौसमी फलों का भोग लगाने की मान्यता
पंडित धीरज शर्मा के अनुसार नौतपा और ज्येष्ठ माह में भगवान श्रीकृष्ण, गोपाल जी और ठाकुर जी को मौसमी फलों का भोग लगाना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. विशेष रूप से आम का रस, तरबूज और खरबूजा भगवान को अर्पित करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतल प्रकृति वाले इन फलों का भोग लगाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं. उनका कहना है कि मौसम के अनुरूप भोग लगाने की परंपरा सनातन संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है और इसका आध्यात्मिक महत्व भी माना जाता है.
पुरुषोत्तम मास में करें ये पाठ
कि इस वर्ष पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व है. यह मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आता है. ऐसे में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम और गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन स्तोत्रों का नियमित पाठ करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए ये उपाय जीवन में शुभ फल प्रदान करने वाले माने जाते हैं.

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