एआई से नौकरियां जाने का डर बेवजह? टेक दिग्गजों ने बदली अपनी बात
वाशिंगटन। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर नौकरियों के खत्म होने का जो डर बीते कुछ सालों से मंडरा रहा था, उस अब गूगल, एनवीडिया और चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई जैसी दिग्गज कंपनियों के सीईओ बेवजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा और एक सहयोगी के रूप में काम करेगा।
बीते कुछ सालों में एआई के तेजी से विकास और चैटजीपीटी जैसे टूल्स के आने से यह बहस और तेज हो गई थी कि लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं। दुनिया भर में कई कंपनियों ने एआई के नाम पर छंटनी भी की, जिससे डर बढ़ गया। लेकिन अब इन्हीं टेक दिग्गजों के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं, जो एआई के भविष्य को लेकर अधिक आशावादी दिख रहे हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में स्वीकार किया कि एआई को लेकर नौकरियों के खत्म होने का उनका अपना अनुमान गलत साबित हुआ है। उन्हें लगा था कि एआई सबसे पहले एंट्री-लेवल ऑफिस जॉब्स को तेजी से प्रभावित करेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा अभी तक देखने को नहीं मिला। ऑल्टमैन ने कहा कि वह अपनी गलती से खुश हैं। उनके मुताबिक, एआई भले ही कई काम आसान कर रहा हो, लेकिन मानवीय जुड़ाव और बातचीत की अहमियत को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया है, जिसे मशीनें आसानी से कॉपी नहीं कर सकतीं।
दूसरी ओर, अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग ने कहा कि एआई नौकरियों को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि यह उन लोगों को आगे बढ़ने का मौका देगा जो एआई को सीखते और इसके साथ काम करना चाहते है। उन्होंने उन कंपनियों पर भी सवाल उठाया जो हर छंटनी का कारण एआई को बताती हैं। हुआंग का तर्क है कि एआई अभी इतना परिपक्व नहीं है कि अचानक पूरी दुनिया की नौकरियां खत्म कर दे।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई भी एआई को डर के बजाय एक नए उपकरण के रूप में देखने की बात करते रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी एआई के साथ काम करके अपना भविष्य बनाएगी और लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी। पिचाई का मानना है कि एआई इंसानों की मदद करेगा, लेकिन लोगों को नई स्किल्स सीखनी होंगी।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चुनौती खत्म हो गई है। कुछ एंट्री-लेवल और दोहराए जाने वाले काम कम हुए हैं, लेकिन साथ ही एआई ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग और एआई -आधारित कंटेंट वर्क जैसे नए तरह के काम भी पैदा हो रहे हैं। एक नई रिसर्च भी दर्शाती है कि एआई सीधे नौकरियां खत्म करने के बजाय काम करने के तरीके और जिम्मेदारियों को बदल रहा है।

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