कर्जदारों को फिलहाल राहत, नहीं बढ़ेगा ईएमआई का बोझ: आरबीआई ने मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को रखा यथावत
मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा कर दी है। समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मुख्य नीतिगत दर यानी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई के दबाव और आर्थिक विकास के सामने खड़ी चुनौतियों के बीच केंद्रीय बैंक का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गवर्नर ने आश्वस्त किया कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बावजूद भारत की आंतरिक आर्थिक गतिविधियां मजबूत और स्थिर बनी हुई हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6% किया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आ रही दिक्कतों का असर अब घरेलू अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। उत्पादन लागत बढ़ने और वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर होने के कारण भारत के वस्तु निर्यात के सामने भी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ (आर्थिक विकास दर) के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। गवर्नर के अनुसार, एमपीसी आने वाले समय में नीतिगत बदलावों के लिए पूरी तरह से आर्थिक आंकड़ों और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।
बढ़ती महंगाई और चालू खाते के घाटे पर पैनी नजर
ऊर्जा उत्पादों के महंगे होने और वैश्विक व्यापार नीतियों में अनिश्चितता के चलते भारत के चालू खाते के घाटे (सीएडी) पर दबाव बढ़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया के संकट को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (सीपीआई) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि भारत के पास किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
विदेशी निवेशकों को राहत और बैंकिंग तंत्र में तरलता पर जोर
देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में नकदी (लिक्विडिटी) की कमी नहीं होने देगा। इसके साथ ही विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए निवेश के नियमों को सरल बनाया गया है। अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और ओसीआई कार्डधारकों के लिए भी भारतीय शेयर बाजार में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है। वहीं, रुपये की विनिमय दर पर केंद्रीय बैंक ने अपनी पुरानी नीति को ही जारी रखा है, जिसका मतलब है कि आरबीआई रुपये को किसी तय दायरे में बांधने के बजाय बाजार के रुख पर छोड़ रहा है।

बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई
इंदौर और विकास हैं एक दूसरे के पर्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कृषि में छत्तीसगढ़ का नया अध्याय बनाया धमतरी जिले ने