ITR 2026 में टैक्स कैलकुलेशन को लेकर भ्रम, जानें 20% टैक्स दिखने का कारण
नई दिल्ली। भारत में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना हर करदाता के वित्तीय जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन टैक्स नियमों की जटिलता के कारण अक्सर लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला तब सामने आया, जब एक टैक्सपेयर ने शिकायत की कि लिस्टेड शेयरों को बेचने से उसे शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) के रूप में ₹8,15,000 की आय हुई थी और इसके अलावा उसकी कोई अन्य कमाई नहीं थी। करदाता का तर्क था कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत चूंकि उसकी कुल सालाना आमदनी ₹12 लाख की टैक्स-फ्री सीमा से काफी नीचे है, इसलिए उसकी टैक्स देनदारी शून्य होनी चाहिए, मगर इसके बावजूद इनकम टैक्स विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल उसकी इस आय पर सीधे 20 फीसदी की फ्लैट दर से टैक्स की गणना कर रहा है।
टैक्सपेयर की उलझन और ई-फाइलिंग पोर्टल पर उठते सवाल
करदाता ने 'आस्क वॉलेट वाइज' नामक एक वित्तीय परामर्श मंच पर अपनी समस्या साझा करते हुए पूछा कि उसने मात्र 8 महीनों के भीतर घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड स्टॉक बेचकर ₹8,15,000 का अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कमाया है। करदाता के अनुसार, नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के नियमानुसार जब ₹12 लाख तक की आय पर धारा 87A (Section 87A) के तहत टैक्स रिबेट (छूट) का प्रावधान है, तो पोर्टल द्वारा उस पर टैक्स लगाना तकनीकी रूप से गलत है। उसने आशंका जताई कि शायद इनकम टैक्स यूटिलिटी या पोर्टल के सॉफ्टवेयर में कोई तकनीकी खराबी (गड़बड़ी) है, जिसके कारण उसकी कुल आय को सामान्य स्लैब रेट के बजाय एक विशेष उच्च दर से आंका जा रहा है।
विशेषज्ञों का स्पष्टीकरण: पोर्टल में कोई खराबी नहीं, टैक्स नियम ही अलग हैं
इस वित्तीय उलझन पर कर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इनकम टैक्स पोर्टल पूरी तरह सही तरीके से काम कर रहा है और सॉफ्टवेयर में किसी भी प्रकार की कोई तकनीकी खामी नहीं है। जानकारों के मुताबिक, आयकर अधिनियम की धारा 87A के तहत नई टैक्स व्यवस्था में मिलने वाली अधिकतम ₹60,000 तक की कर छूट (रिबेट) केवल उन आय पर लागू होती है, जिन पर सामान्य टैक्स स्लैब के आधार पर कर की गणना की जाती है। यह रिबेट उन विशेष श्रेणियों की कमाई पर देय नहीं होती, जिनके लिए आयकर कानून में पहले से ही 'विशेष कर दरें' (Special Tax Rates) निर्धारित की गई हैं, भले ही टैक्सपेयर की सभी स्रोतों से मिलाकर कुल शुद्ध आय ₹12 लाख के दायरे के अंदर ही क्यों न आती हो।
विशेष आय पर लागू होती है फ्लैट दर और एनआरआई के लिए अलग नियम
टैक्स एक्सपर्ट्स ने नियमों का ब्यौरा देते हुए बताया कि अगर कोई व्यक्ति भारत का निवासी (रेजिडेंट) करदाता है, तो पोर्टल लिस्टेड शेयरों से होने वाले शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन पर ₹4,00,000 की शुरुआती मूल छूट सीमा (बेसिक एग्जॉप्शन लिमिट) का लाभ देने के बाद, शेष बची राशि पर 20 प्रतिशत की फ्लैट दर से टैक्स वसूलता है। निवासी भारतीयों को अपनी इस विशेष आय को सामान्य स्लैब की बची हुई छूट के साथ एडजस्ट (सेट-ऑफ) करने की आंशिक सुविधा मिलती है। वहीं दूसरी ओर, यदि करदाता एक अनिवासी भारतीय (NRI) है, तो उसे इस अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर बिना किसी मूल छूट का फायदा मिले, पूरे ₹8,15,000 पर सीधे 20 फीसदी की दर से फ्लैट टैक्स चुकाना होगा, क्योंकि गैर-निवासियों के लिए सामान्य आय की कमी को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन से समायोजित करने का कोई कानूनी विकल्प मौजूद नहीं है।

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