जस्टिस वर्मा मामले की रिपोर्ट संसद में होगी पेश, मानसून सत्र पर सबकी नजर
नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है, जो 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं, क्योंकि केंद्र सरकार इस दौरान एक बेहद कड़ा संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसके तहत 30 दिनों तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे जाएंगे। वहीं, विपक्ष ने भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 'ऑपरेशन सिंदूर' में सैनिकों की शहादत वाले बयान, पेपर लीक, महंगाई और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट आएगी सामने
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संकेत दिए हैं कि सत्र के पहले या दूसरे दिन ही नकदी बरामदगी प्रकरण से जुड़े जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच कमेटी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रख दी जाएगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद आगे की संसदीय और कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इसके साथ ही, लोकसभा में विपक्षी दलों की मान्यता और सदन में उनके बैठने की व्यवस्था से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी जल्द ही निर्णय होने की संभावना है।
टीएमसी, शिवसेना और डीएमके की सीटों में बदलाव के संकेत
इस सत्र से पहले लोकसभा में सांसदों के बैठने के सिटिंग अरेंजमेंट में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसदों ने कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े कुछ लंबित मामलों पर भी लोकसभा अध्यक्ष का अंतिम फैसला आने की उम्मीद है। इन फैसलों का सीधा असर सदन के भीतर दलों की संसदीय स्थिति और उनकी राजनीतिक भूमिका पर पड़ेगा।
130वें संविधान संशोधन विधेयक पर जेपीसी की अहम बैठक
सत्र की शुरुआत से ठीक पहले, आगामी 17 जुलाई को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह समिति संविधान के 130वें संशोधन विधेयक, 2025 की बारीकी से जांच कर रही है और इस बैठक में समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार (एडॉप्ट) करने पर विचार करेगी। इस विधेयक के कानूनी रूप लेने के बाद देश की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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