वांगचुक मुद्दे पर उद्धव का केंद्र पर वार, बोले- पाकिस्तान से बातचीत मंजूर, अपने लोगों से क्यों नहीं?
मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में छात्रों और कार्यकर्ताओं पर की गई कार्रवाई के विरोध में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। शिवाजी पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि ऐसी सरकार को बदलने के लिए एक व्यापक संघर्ष की शुरुआत की जाए, जो जनता और युवाओं के प्रति जवाबदेह नहीं है।
सरकार की प्राथमिकता और दोहरे मापदंड पर प्रहार
उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत करने में तो कोई संकोच नहीं है, लेकिन देश के युवाओं के भविष्य के लिए अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से बात करने के लिए उनके पास समय नहीं है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार पाकिस्तान के साथ संवाद के लिए दरवाजे खुले रखने की बात करती है, जो लगातार घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों में संलिप्त रहता है, वहीं दूसरी तरफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे अपने ही देश के नागरिक की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरएसएस नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर वे देश के युवाओं की बात सुनने से क्यों कतरा रहे हैं।
युवाओं के भविष्य और संघर्ष की अपील
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने इस आंदोलन को केवल एक कार्यकर्ता का संघर्ष मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल रोजगार या शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा युवाओं का भविष्य छीनने के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सच्चाई को पर्दे के पीछे छिपाकर नहीं रखा जा सकता और सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने सशस्त्र बलों के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण विकसित किए हैं, उन्हें राष्ट्र-विरोधी करार देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रों में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च, सभाएं और मशाल मार्च निकालकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएं।
लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
उद्धव ठाकरे ने लोगों से अपील की है कि वे 'मैं देशभक्त हूं, अंधभक्त नहीं' का संदेश लेकर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि देश के हर कोने में जनता अपनी मुखर आवाज दर्ज कराए। उन्होंने साफ किया कि यह केवल सत्ता बदलने की नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की लड़ाई है। ठाकरे ने जोर देकर कहा कि चंदे और वोट की राजनीति से ऊपर उठकर अब युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए सड़कों पर उतरना अनिवार्य हो गया है।

राशिफल 24 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी आर्थिक संबल
बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई