रायपुर में 5 लोगों की मौत का मामला बना मिस्ट्री, जांच में जुटी पुलिस के सामने कई चुनौतियां
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमयी मौत का मामला इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस बहुचर्चित और सनसनीखेज मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है और तेजी से तफ्तीश जारी है। हालांकि, पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, स्थिति यह है कि एक सवाल का संतोषजनक जवाब मिलते ही ठीक उसके सामने दूसरा उलझा हुआ नया सवाल आकर खड़ा हो जाता है। पुलिस जिस गति से सच के करीब पहुंचने का प्रयास कर रही है, यह पूरी गुत्थी उतनी ही ज्यादा पेचीیدہ और उलझती चली जा रही है।
रायपुर में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत की गुत्थी अब भी अनसुनी और अनसुलझी
राजधानी रायपुर से बीते शुक्रवार की रात जब एक ही परिवार के 5 लोगों के मृत मिलने की दिल दहला देने वाली खबर सामने आई, तो हर कोई सन्न रह गया। खबर के सार्वजनिक होते ही सबसे पहला और बड़ा सवाल यह उठा कि आखिर इस सामूहिक त्रासदी के पीछे की मुख्य वजह क्या है? पुलिस ने भी बिना देर किए इसी अहम सवाल की गुत्थी सुलझाने के लिए अपनी जांच शुरू कर दी। जब पुलिस दल घटनास्थल वाले घर के भीतर दाखिल हुआ, तो उन्होंने देखा कि चार सदस्यों के शव जमीन पर पड़े हुए थे, जबकि परिवार के मुखिया का शव फंदे से लटक रहा था। इस शुरुआती पहेली को सुलझाने के लिए पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और घटनास्थल की बारीकी से फोरेंसिक (FSL) जांच शुरू की। पुलिस और एफएसएल टीम को घर के अंदर से जहर होने के कुछ अहम सुराग मिले, और थोड़ी देर बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो गई कि पत्नी और तीनों मासूम बच्चों की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई थी, जबकि पति ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त की थी। जब मौत के 'क्यों और कैसे' का यह प्राथमिक कारण समझ आया, तो तुरंत अगला और बड़ा सवाल सामने आ गया— आखिर यह सब किसने किया?
किसने दिया इस खौफनाक घटना को अंजाम?
पुलिस के सामने जब यह सवाल आया कि इस हत्याकांड और आत्महत्या के पीछे किसका हाथ है, तो शुरुआती जांच के दायरे से जो जवाब सामने आया, उसके मुताबिक परिवार के मुखिया शाहिद ने ही पहले अपने पूरे परिवार को जहर दिया और उसके बाद खुद आत्महत्या कर ली। पुलिस के इस शुरुआती निष्कर्ष के पीछे घर से मिले पुख्ता सबूत आधार बने थे। न तो घर के भीतर किसी प्रकार के संघर्ष या झड़प के निशान मिले थे और न ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर कोई बाहरी संदिग्ध व्यक्ति घर के अंदर आता-जाता दिखाई दिया था।
गहन पड़ताल में यह भी सामने आया कि गुरुवार की रात से परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला था और शुक्रवार को सुबह करीब 9:15 बजे शाहिद को आखिरी बार जिंदा देखा गया था। जब पुलिस को 'किसने' वाले सवाल का एक हद तक तार्किक जवाब मिल गया, तो जांच का दायरा तीसरे और सबसे बड़े सवाल पर आकर टिक गया— आखिर क्यों?
क्यों उठाया गया यह खौफनाक कदम और क्या था कर्ज का सच?
आखिर क्यों शाहिद ने अपने ही हाथों से अपने पूरे परिवार को जहर देकर मारा और क्यों खुद फंदे पर झूल गया? क्यों इस घटना को अंजाम देने से ठीक कुछ दिन पहले ही उसने पूरे महीनेभर के राशन का भारी भंडारण घर में कर लिया था? जब पुलिस ने इस 'क्यों' का जवाब तलाशना शुरू किया, तो कई तरह की बातें और कहानियां हवा में तैरने लगीं। इसमें जो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी, वह थी भारी-भरकम कर्ज का मानसिक तनाव।
घटना के तुरंत बाद जब पुलिस इस एंगल पर काम कर रही थी, तब विभिन्न माध्यमों से इस खौफनाक कांड की तह तक जाने की कोशिशें चल रही थीं। जब पुलिस ने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ की, तो कर्ज के तनाव वाली बात बहुत जोर-शोर से सामने आई। इसी बिना पर पुलिस ने भी कर्ज के दबाव को ही इस पूरी घटना का मुख्य कारण मानकर अपनी दिशा तय की। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, मानो सारे पत्ते ही पलट गए और लोगों के बयान तेजी से बदलने लगे।
जो स्थानीय लोग मीडिया के सामने खुलकर कर्ज के तनाव की बात कह रहे थे, उन्होंने पुलिस के सामने आकर इसे केवल सुनी-सुनाई बातें बताकर अपने बयान बदल दिए। इसके अलावा, जो पड़ोसी पहले यह दावा कर रहे थे कि घटना वाले दिन कुछ अनजान लोग दो-तीन बार घर पर पूछताछ करने आए थे, उन्होंने भी पुलिस पूछताछ में अपने बयानों से यू-टर्न ले लिया। पुलिस की गहराई से की गई तफ्तीश में यह साफ हुआ कि हालांकि शाहिद ने कुछ लोगों से कर्ज ले रखा था, लेकिन वह समय पर सभी का पैसा चुकता भी कर देता था। घटना वाले दिन जो लड़के बार-बार उसके घर के पास आ रहे थे, वे असल में शाहिद के बड़े बेटे के दोस्त थे, जो फोन न उठाए जाने के कारण उसकी खैरियत जानने और मिलने पहुंचे थे। पुलिस रिकॉर्ड में किसी भी व्यक्ति द्वारा कर्ज को लेकर कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके अलावा, घर की तलाशी के दौरान मिला एक महीने का राशन और पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया कि उसने जिससे भी पैसे उधार लिए थे, उनका भुगतान वह पहले ही कर चुका था।
पुलिस की जांच नए और पेचीदा सवालों में उलझ गई है।
फिलहाल रायपुर पुलिस इस 'क्यों' के असली और पुख्ता जवाब को तलाशने में पूरी ताकत से जुटी हुई है। इसके साथ ही, 'किसने' वाले जवाब को महज एक प्रारंभिक निष्कर्ष से बदलकर अकाट्य और पुख्ता सबूतों में तब्दील करने की प्रक्रिया भी चल रही है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और अहम होगा कि पुलिस को इस रहस्यमयी घटना के पीछे छिपे 'क्यों' का वास्तविक जवाब कितनी जल्दी मिलता है। और जब वह जवाब सामने आएगा, तो क्या वह इस मामले का आखिरी पड़ाव होगा, या फिर पुलिस के सामने कोई और नई और बड़ी चुनौती आ खड़ी होगी?

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