पसीने की कमाई को तरस रहे कर्मचारी, रतन एम्पोरियम पर उठे सवाल
जबलपुर।बिजली कम्पनी के ओएंडएम सर्कल के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए वर्तमान समय काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। भीषण गर्मी और तपते मौसम के बीच बिजली लाइनों का रखरखाव करने वाले इन श्रमिकों को मार्च माह का वेतन अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। जबलपुर के पाटन, सिहोरा और जबलपुर संभाग में अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि रतन एम्पोरियम नामक ठेका कंपनी भुगतान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रही है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार हर महीने की 7 तारीख तक मानदेय मिलना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। वेतन न मिलने से सैकड़ों परिवारों के सामने दैनिक खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है।
टेंडर प्रक्रिया में देरी और बढ़ती अनियमितताएं
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक जबलपुर सिटी और ओएंडएम सर्कल में कार्यरत ठेका कंपनियों का कार्यकाल 31 मार्च को पूरा हो चुका है। नए टेंडर की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है, जिसके कारण पुरानी कंपनियों को ही 3 महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि रतन एम्पोरियम को भविष्य में नया अनुबंध मिलने की संभावना कम लग रही है, जिसके कारण कंपनी ने पारिश्रमिक रोकना शुरू कर दिया है। ठेका अवधि विस्तार के दौरान कर्मचारियों से पूरा काम लिया जा रहा है, किंतु उनके वित्तीय हितों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता बरती जा रही है।
अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी परेशानी
इस पूरे प्रकरण में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब पीड़ित कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर संभागीय कार्यपालन अभियंता के पास पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि वे सीधे विभाग के कर्मचारी नहीं हैं। फील्ड पर जोखिम भरे कार्यों के दौरान तो इन कर्मियों का उपयोग किया जाता है, परंतु अधिकारों और सुरक्षा के समय हाथ खींच लिए जाते हैं। मप्र विमं तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि यदि रतन एम्पोरियम जैसी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई और ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारी अब जोखिम भत्ते और बकाया वेतन के लिए विभाग के ठोस हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

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