गौरव गोगोई का बयान: BJP विकास नहीं, सत्ता पर ध्यान दे रही है
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची भगदड़ और गहराती जा रही है। पार्टी के सांसदों और विधायकों की खुली बगावत के बीच अब इस्तीफों की झड़ी लग गई है। इस बड़े सियासी संकट पर अब देश के अन्य विपक्षी दलों की भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने टीएमसी के इस मुश्किल दौर के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया है। गोगोई ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह जनता की सेवा करने के बजाय सिर्फ सत्ता हथियाने के हथकंडे अपना रही है।
बीजेपी पर लगाया लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बीजेपी राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए लोकतंत्र को लगातार कमजोर कर रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक बीजेपी का यह रवैया रहेगा, तब तक देश की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाएगा। गोगोई के अनुसार, बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद अब वहां बीजेपी को जनता की भलाई के लिए काम करना चाहिए था, लेकिन वह अपने चुनावी घोषणापत्र के वादों को भूलकर केवल विपक्षी दलों को तोड़ने और सत्ता पर पूरी तरह कब्जा करने की रणनीति में व्यस्त है। उनका पूरा ध्यान विकास से ज्यादा विपक्ष को खत्म करने पर लगा हुआ है।
तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
गौरव गोगोई ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोकतंत्र को किनारे रखकर सत्ता हासिल करने की बीजेपी की यह राजनीति देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर का असंतोष पूरी तरह सड़कों और संसद तक पहुंच चुका है। इसी सिलसिले में राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनसे ठीक पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव जैसे दिग्गज नेता भी संसद और पार्टी छोड़ चुके हैं। एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है, और सूत्रों की मानें तो अगले एक हफ्ते में तीन और सांसद पाला बदल सकते हैं।
लोकसभा में भी बड़ी टूट की तैयारी, एनडीए को समर्थन का दावा
टीएमसी के लिए सिर्फ राज्यसभा या विधानसभा ही नहीं, बल्कि लोकसभा में भी स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी है। खबरें आ रही हैं कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 19 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं। बागी सांसदों के इस बड़े गुट का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं।
बागी विधायक रिताब्रत का बढ़ा कुनबा
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होती जा रही है। पार्टी से निष्कासित और वर्तमान में विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के नेता बने विधायक रिताब्रत बनर्जी का कुनबा लगातार बड़ा होता जा रहा है। रिताब्रत बनर्जी के साथ बागी विधायकों की संख्या अब 58 से बढ़कर 64 तक पहुंच गई है। रिताब्रत ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में ममता कैंप के कई और विधायक उनके साथ आकर जुड़ेंगे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर बगावत की यही रफ्तार रही, तो बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए अपनी जमीन बचाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगा।

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