नीमच के खेतों में ओले गिरे, सफेद चादर बिछी, अफीम और अन्य फसलों की तबाही
नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच में रविवार शाम अचानक हुई बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया. हालात ऐसे थे कि सड़कें और खेत-खलिहान कश्मीर की तरह बिल्कुल सफेद हो गए, लेकिन यह सफेदी सुकून नहीं बल्कि किसानों के लिए बर्बादी का संदेश लेकर आई. अचानक हुई ओलावृष्टि ने लहलहाती फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है.
ओलावृष्टि से अफीम की फसलों को भारी नुकसान
नीमच और मंदसौर की पहचान अफीम की खेती से है, जिसे यहां के किसान अपनी औलाद की तरह सहेजता है. लाखों रुपये के खर्च और महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब फसल पकने को तैयार थी, तभी ओले ने डोडों को छलनी कर दिया. ओलावृष्टि से अफीम के डोडे फट गए और फूल टूटकर जमीन पर बिखर गए.
किसान राकेश पाटीदार का कहना है कि "बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने अफीम की फसल को बर्बाद कर दिया है, क्योंकि इस बारिश से सबसे अधिक नुकसान अफीम की फसल को पहुंचा है, अब विभाग के कड़े मानकों को पूरा करना नामुमकिन होगा, जिससे पट्टे कटने का खतरा मंडरा रहा है."
ओलावृष्टि से बिछ गई गेहूं-लहसुन की भी फसलें
सिर्फ अफीम ही नहीं, बल्कि रबी की अन्य प्रमुख फसलों पर भी प्रकृति ने बेरहमी दिखाई है. खेतों में कटने के लिए तैयार खड़ी गेहूं और चने की फसलें ओले की मार से जमीन पर बिछ गई हैं. वहीं, लहसुन की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है. किसान श्याम पाटीदार ने बताया कि "यह बारिश अमृत नहीं बल्कि जहर बनकर बरसी है. जो फसलें कुछ दिन बाद घर में खुशहाली लाने वाली थीं, अब वे खेतों में सड़ने की कगार पर हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट होगी."
पीड़ित किसानों को मुआवजे की आस
तबाही का यह मंजर केवल भंवरासा तक सीमित नहीं रहा. जीरन तहसील के पालसोडा, केलुखेड़ा, बामणिया और भोपालगंज सहित दर्जनों गांवों में ओलावृष्टि हुई हैं. प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन और सरकार से तत्काल सर्वे करवाकर उचित मुआवजे की मांग की है. साथ ही अफीम काश्तकारों ने केंद्र सरकार से औसत मानकों में ढील देने की गुहार लगाई है ताकि इस आर्थिक तबाही से उन्हें कुछ राहत मिल सके.
नीमच में हुई ओलावृष्टि के मामले में नीमच के कृषि वैज्ञानिक सीपी पचौरी ने बताया कि "नीमच जिले में पूर्व से कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना थी, लेकिन अचानक ही ओलावृष्टि हो गई, जिसमें विशेष कर पलसोड़ा, भंवरासा, केलुखेड़ा, सेमली ईस्तमुरार में अधिक ओलावृष्टि हुई है, इसमें अफीम, धनिया, गेहूं या सरसों जो काटने की कगार पर है. इसमें ओलावृष्टि से नुकसान अधिक पहुंचा है, सोमवार को प्रशासन जैसा भी निर्णय लेता है उसके बाद सर्वे होगा."

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