हाईवे जाम के बाद सियासत तेज, कांग्रेस नेताओं पर दर्ज हुई FIR
धार: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में ७ मई को आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर किए गए विशाल प्रदर्शन के बाद अब राजनीतिक गलियारा गरमा गया है। धार के खलघाट से लेकर मुरैना तक के विशाल क्षेत्र में किसानों की मांगों को लेकर किए गए इस चक्काजाम के कारण पुलिस ने प्रमुख कांग्रेस नेताओं सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज की है। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है और इसे लोकतंत्र पर प्रहार करार दिया है।
किसानों के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन
कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर किसानों से किए गए वादे खिलाफी का आरोप लगाते हुए इस बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसमें मुख्य मुद्दा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और उचित दाम न मिलने को बनाया गया। ग्यारह जिलों से गुजरने वाले करीब सात सौ सैंतालीस किलोमीटर लंबे मार्ग पर सात अलग-अलग स्थानों पर दोपहर के समय चार घंटे तक आवाजाही रोकी गई। यद्यपि कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य आम जनता को असुविधा पहुँचाना नहीं है, किंतु इस विरोध के चलते हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
दिग्गज नेताओं सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर कानूनी शिकंजा
खलघाट पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करने के मामले में गंभीरता दिखाते हुए जीतू पटवारी और उमंग सिंघार जैसे दिग्गज नेताओं सहित बाला बच्चन, कांतिलाल भूरिया और डॉ. विक्रांत भूरिया जैसे विधायकों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार चक्काजाम के कारण सार्वजनिक व्यवस्था भंग हुई और यातायात नियमों का उल्लंघन किया गया, जिसके आधार पर इन सभी प्रमुख चेहरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही कांग्रेस खेमे में आक्रोश फैल गया और इसे सरकार की दमनकारी नीति बताया जाने लगा है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सरकार पर सीधा हमला
अपने ऊपर दर्ज हुए मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों की एकजुटता से डर गई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या किसानों के लिए उचित मुआवजा, बिजली और खाद की मांग करना अब अपराध की श्रेणी में आता है। सिंघार ने सरकार को चुनौती देते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता लाठी खाने और जेल जाने से पीछे नहीं हटेंगे तथा आने वाले समय में इस आंदोलन को और भी अधिक धार दी जाएगी।
सत्ता पक्ष का पलटवार और मुख्यमंत्री की नसीहत
कांग्रेस के इस आंदोलन और आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्षी दल को उनके शासनकाल की याद दिलाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को वर्तमान में प्रदर्शन करने के बजाय अपने समय में किसानों पर हुए कथित अत्याचारों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं में बाधा डालना किसी भी सूरत में उचित नहीं है और प्रशासन कानून के दायरे में रहकर अपनी कार्रवाई जारी रखेगा, जिससे यह विवाद अब प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है।

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