सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अमित जोगी की सजा पर लगी रोक
नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे और 'जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़' के नेता अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी न्यायिक राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी उस सजा पर रोक लगा दी, जो हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की तीन सदस्यीय पीठ ने अमित जोगी की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया।
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कोर्ट का आदेश: पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक अमित जोगी की सजा और आत्मसमर्पण के निर्देश पर रोक प्रभावी रहेगी।
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चुनौती: अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के आदेश को पलट दिया गया था।
क्या है 2003 का राम अवतार जग्गी हत्याकांड?
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित हत्याकांडों में से एक है:
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घटना: 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता और व्यापारी राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी।
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जांच: 2004 में सत्ता परिवर्तन के बाद इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी।
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कानूनी उतार-चढ़ाव: * 2007: निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि 28 अन्य को उम्रकैद सुनाई थी।
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2026 (हालिया): छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर अमित जोगी को हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में तर्क दिया था कि सह-आरोपियों के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्यों को अमित जोगी के संदर्भ में अनदेखा नहीं किया जा सकता। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
आगे क्या? नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील में हुई देरी को माफ कर दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ किया था। अब सर्वोच्च अदालत इस मामले के कानूनी पहलुओं और हाई कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगी, तब तक अमित जोगी जेल जाने से सुरक्षित रहेंगे।

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